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वाल्मीकि रामायण 74.17

नैर्ऋतेन्द्र महावीर्य स्वरेण त्वा ऽभिलक्षये।
पीड्यमानः शितैर्बाणैर्न त्वां पश्यामि चक्षुषा ।। ६.७४.१७ ।।

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