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वाल्मीकि रामायण 73.8

स एवमुक्त्वा त्रिदशेन्द्रशत्रुरापृच्छ्य राजानमदीनसत्त्वः।
समारुरोहानिलतुल्यवेगं रथं खरश्रेष्ठसमाधियुक्तम् ।। ६.७३.८ ।।

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