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वाल्मीकि रामायण 73.53

स शूलनिस्त्रिंशपरश्वधानि व्याविध्य दीप्तानलसन्निभानि।
सविस्फुलिङ्गोज्ज्वलपावकानि ववर्ष तीर्व्रं प्लवगेन्द्रसैन्ये ।। ६.७३.५३ ।।

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