ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 7373.47वाल्मीकि रामायण 73.47आकुलां वानरीं सेनां शरजालेन मोहिताम्। हृष्टः स परया प्रीत्या ददर्श क्षतजोक्षिताम् ।। ६.७३.४७ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय