Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 73.42

अष्टादशशरैस्तीक्ष्णैः स विद्ध्वा गन्धमादनम्।
विव्याध नवभिश्चैव नलं दूरादवस्थितम् ।। ६.७३.४२ ।।

पूरा अध्याय