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वाल्मीकि रामायण 73.38

रामस्यार्थे पराक्रम्य वानरास्त्यक्तजीविताः।
नर्दन्तस्ते ऽभिवृत्तास्तु समरे सशिलायुधाः ।। ६.७३.३८ ।।

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