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वाल्मीकि रामायण 73.22

प्रदक्षिणावर्तशिखस्तप्तकाञ्चनभूषणः।
हविस्तत् प्रतिजग्राह पावकः स्वयमास्थितः ।। ६.७३.२२ ।।

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