ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 7171.5वाल्मीकि रामायण 71.5स विस्फार्य महच्चापं किरीटी मृष्टकुण्डलः। नाम विश्रावयामास ननाद च महास्वनम् ।। ६.७१.५ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय