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वाल्मीकि रामायण 70.7

त्रिशिरास्तं प्रचिच्छेद शरैराशीविषोपमैः।
स वृक्षं कृत्तमालोक्य उत्पपात तदा ऽङ्गदः ।। ६.७०.७ ।।

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