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वाल्मीकि रामायण 70.59

गृहीत्वा तां गदां भीमामाविध्य च पुनःपुनः।
मत्तानीकं महात्मानं जघान रणमूर्धनि ।। ६.७०.५९ ।।

पूरा अध्याय