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वाल्मीकि रामायण 70.3

भ्रातृव्यसनसन्तप्तस्तथा देवान्तको बली।
आदाय परिघं दीप्तमङ्गदं समभिद्रवत् ।। ६.७०.३ ।।

पूरा अध्याय