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वाल्मीकि रामायण 70.18

परिघाभिहतश्चापि वानरेन्द्रात्मजस्तदा।
जानुभ्यां पतितो भूमौ पुनरेवोत्पपात ह ।। ६.७०.१८ ।।

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