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वाल्मीकि रामायण 7.17

तेषाम् वीर्य गुण उत्साहैर् न समो राघवो रणे ।
प्रसह्य ते त्वया राजन् हताः परम दुर्जयाः ॥६-७-१७॥

पूरा अध्याय