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वाल्मीकि रामायण 69.66

विकीर्णैः पर्वताग्रैश्च द्रुमैश्छिन्नैश्च संयुगे।
हतैश्च कपिरक्षोबिर्दुर्गमा वसुधा ऽभवत् ।। ६.६९.६६ ।।

पूरा अध्याय