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वाल्मीकि रामायण 69.5

त्वया ऽसकृद्विशस्त्रेण विशस्ता देवदानवाः।
स सर्वायुधसम्पन्नो राघवं शास्तुमर्हसि ।। ६.६९.५ ।।

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