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वाल्मीकि रामायण 69.23

त्रिशिरा रथमास्थाय विरराज धनुर्धरः।
सविद्युदुल्कः शैलाग्रे सेन्द्रचाप इवाम्बुदः ।। ६.६९.२३ ।।

पूरा अध्याय