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वाल्मीकि रामायण 68.24

इति बहुविधमाकुलान्तरात्मा कृपणमतीव विलप्य कुम्भकर्णम्।
न्यपतदथ दशाननो भृशार्तस्तमनुजमिन्द्ररिपुं हतं विदित्वा ।। ६.६८.२४ ।।

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