ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 6666.5वाल्मीकि रामायण 66.5आत्मानमत्र विस्मृत्य वीर्याण्यभिजनानि च। क्व गच्छत भयत्रस्ताः प्राकृता हरयो यथा ।। ६.६६.५ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय