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वाल्मीकि रामायण 66.45

नापराध्यन्ति मे कामं वानरा वनचारिणः।
जातिरस्माद्विधानां सा पुरोद्यानविभूषणम् ।। ६.६५.४५ ।।

पूरा अध्याय