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वाल्मीकि रामायण 66.37

स पुष्पवर्षैरवकीर्यमाणो धृतातपत्रः शितशूलपाणिः।
मदोत्कटः शोणितगन्धमत्तो विनिर्ययौ दानवदेवशत्रुः ।। ६.६५.३७ ।।

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