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वाल्मीकि रामायण 66.33

प्रहर्षमुपनीताश्च वालिपुत्रेण धीमता।
आज्ञाप्रतीक्षास्तस्थुश्च सर्वे वानरयूथपाः ।। ६.६६.३३ ।।

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