वाल्मीकि रामायण 65.56
तद्वानरानीकमतिप्रचण्डं दिशो द्रवद्भिन्नमिवाभ्रजालम्।
स कुम्भकर्णः समवेक्ष्य हर्षान्ननाद भूयो घनवद् घनाभः ।। ६.६५.५६ ।।
तद्वानरानीकमतिप्रचण्डं दिशो द्रवद्भिन्नमिवाभ्रजालम्।
स कुम्भकर्णः समवेक्ष्य हर्षान्ननाद भूयो घनवद् घनाभः ।। ६.६५.५६ ।।