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वाल्मीकि रामायण 65.54

स लङ्घयित्वा प्राकारं पद्भ्यां पर्वतसन्निभः।
ददर्शाभ्रघनप्रख्यं वानरानीकमद्भुतम् ।। ६.६५.५४ ।।

पूरा अध्याय