ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 6565.3वाल्मीकि रामायण 65.3गर्जन्ति न वृथा शूरा निर्जला इव तोयदाः। पश्य सम्पाद्यमानं तु गर्जितं युधि कर्मणा ।। ६.६५.३ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय