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वाल्मीकि रामायण 65.21

आदाय निशितं शूलं शत्रुशोणितरञ्जितम्।
कुम्भकर्णो महातेजा रावणं वाक्यमब्रवीत् ।। ६.६५.२१ ।।

पूरा अध्याय