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वाल्मीकि रामायण 65.11

कश्चिन्मे त्वत्समो नास्ति सौहृदेन बलेन च।
गच्छ शत्रुवधाय त्वं कुम्भकर्ण जयाय च ।। ६.६५.११ ।।

पूरा अध्याय