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वाल्मीकि रामायण 64.28

प्रीतो नाम ततो भूत्वा भृत्यानां त्वमरिन्दम।
भोगांश्च परिवारांश्च कामांश्च वसु दापय ।। ६.६४.२८ ।।

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