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वाल्मीकि रामायण 60.96

स राजमार्गं वपुषा प्रकाशयन् सहस्ररश्मिर्धरणीमिवांशुभिः ।
जगाम तत्राञ्जलिमालया वृतः शतक्रतुर्गेहमिव स्वयम्भुवः ।। ६.६०.९६ ।।।।

पूरा अध्याय