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वाल्मीकि रामायण 60.62

तस्य दीप्ताग्निसदृशे विद्युत्सदृशवर्चसी ।
ददृशाते महानेत्रे दीप्ताविव महाग्रहौ ।। ६.६०.६२ ।।।।

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