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वाल्मीकि रामायण 60.55

रज्जुबन्धनबद्धाभिः शतघ्नीभिश्च सर्वतः ।
वध्यमानो महाकायो न प्राबुध्यत राक्षसः ।। ६.६०.५५ ।।।।

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