Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 60.4

स काञ्चनमयं दिव्यमाश्रित्य परमासनम् ।
विप्रेक्षमाणो रक्षांसि रावणो वाक्यमब्रवीत् ।। ६.६०.४ ।।।।

पूरा अध्याय