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वाल्मीकि रामायण 60.1

स प्रविश्य पुरीं लङ्कां रामबाणभयार्दितः ।
भग्नदर्पस्तदा राजा बभूव व्यथितेन्द्रियः ।। ६.६०.१ ।।।।

पूरा अध्याय