ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 5858.55वाल्मीकि रामायण 58.55स गतासुर्गतश्रीको गतसत्त्वो गतेन्द्रियः । पपात सहसा भूमौ छिन्नमूल इव द्रुमः ।। ६.५८.५५ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय