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वाल्मीकि रामायण 58.46

तावुभौ वाहिनीमुख्यौ जातवैरौ तरस्विनौ ।
स्थितौ क्षतजदिग्धाङ्गौ प्रभिन्नाविव कुञ्जरौ ।। ६.५८.४६ ।।।।

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