Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 58.21

दुर्मुखः पुनरुत्थाय कपिः स विपुलद्रुमम् ।
राक्षसं क्षिप्रहस्तस्तु समुन्नतमपोथयत् ।। ६.५८.२१ ।।।।

पूरा अध्याय