Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 57.42

प्रहस्तं त्वभिनिर्यान्तं प्रख्यातबलपौरुषम् ।
युधि नानाप्रहरणा कपिसेना ऽभ्यवर्तत ।। ६.५७.४२ ।।।।

पूरा अध्याय