Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 57.32

व्यूढेनैव सुघोरेण पूर्वद्वारात् स निर्ययौ ।
गजयूथनिकाशेन बलेन महता वृतः ।। ६.५७.३२ ।।।।

पूरा अध्याय