ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 5757.3वाल्मीकि रामायण 57.3तां राक्षसगणैर्गुप्तां गुल्मैर्बहुभिरावृताम् । ददर्श नगरीं लङ्कां पताकाध्वजमालिनीम् ।। ६.५७.३ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय