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वाल्मीकि रामायण 55.25

द्रुमशक्तिशिलाप्रासैर्गदापरिघतोमरैः ।
हरयो राक्षसाश्चैव जघ्नुरन्योन्यमोजसा ।। ६.५५.२५ ।।।।

पूरा अध्याय