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वाल्मीकि रामायण 51.30

रथशीर्षे महान् भीमो गृध्रश्च निपपात ह ।
ध्वजाग्रे ग्रथिताश्चैव निपेतुः कुणपाशनाः ।। ६.५१.३१ ।।।।

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