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वाल्मीकि रामायण 51.15

तदस्त्रबन्धमासाद्य यदि मुक्तौ रिपू मम ।
संशयस्थमिदं सर्वमनुपश्याम्यहं बलम् ।। ६.५१.१६ ।।।।

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