ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 5050.56वाल्मीकि रामायण 50.56सखे राघव धर्मज्ञ रिपूणामपि वत्सल । अभ्यनुज्ञातुमिच्छामि गमिष्यामि यथागतम् ।। ६.५०.५६ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय