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वाल्मीकि रामायण 50.5

विषण्णवदना ह्येते त्यक्तप्रहरणा दिशः ।
प्रपलायन्ति हरयस्त्रासादुत्फुल्ललोचनाः ।। ६.५०.५ ।।।।

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