ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 55.8वाल्मीकि रामायण 5.8तद् वियोग इन्धनवता तच् चिन्ता विपुल अर्चिषा । रात्रिम् दिवम् शरीरम् मे दह्यते मदन अग्निना ॥६-५-८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय