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वाल्मीकि रामायण 5.15

सा नूनम् असित अपान्गी रक्षो मध्य गता सती ।
मन् नाथा नाथ हीना इव त्रातारम् न अधिगच्चति ॥६-५-१५॥

पूरा अध्याय