ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 4949.14वाल्मीकि रामायण 49.14त्वं नित्यं स विषण्णं मामाश्वासयसि लक्ष्मण । गतासुर्नाद्य शक्नोषि मामार्तमभिभाषितुम् ।। ६.४९.१४ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय