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वाल्मीकि रामायण 48.36

ततस्त्रिजटया सार्धं पुष्पकादवरुह्य सा ।
अशोकवनिकामेव राक्षसीभिः प्रवेशिता ।। ६.४८.३६ ।।।।

पूरा अध्याय