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वाल्मीकि रामायण 45.9

तयोः क्षतजमार्गेण सुस्राव रुधिरं बहु ।
तावुभौ च प्रकाशेते पुष्पिताविव किंशुकौ ।। ६.४५.९ ।।।।

पूरा अध्याय