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वाल्मीकि रामायण 45.25

बाणपातान्तरे रामं पतितं पुरुषर्षभम् ।
स तत्र लक्ष्मणो दृष्ट्वा निराशो जीविते ऽभवत् ।। ६.४५.२५ ।।।।

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