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वाल्मीकि रामायण 45.22

पपात प्रथमं रामो विद्धो मर्मसु मार्गणैः ।
क्रोधादिन्द्रजिता येन पुरा शक्रो विनिर्जितः ।। ६.४५.२२ ।।।।

पूरा अध्याय